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राशि का अनुसार रोगो का उपचार

December 2, 2014

राशि के अनुसार रोगो का उपचार

अनादि काल से मनुष्य रोगो बिमारियों से त्रस्त रहा हं। कभी रोगो के लक्षण पकड़ में आ जाते हं,तथा कभी बिमारी का कारण पता हि नहंी चलता । अच्छे सा अच्छा चिकित्सक भी मरीज को स्वस्थ्य करने में असमर्थ होता हं। ज्योतिष शास्त्र में इस तरह के रोगो के उपचार के उपाय बताऐं गयें हैं। अपनी राशि के अनुसार यदि निम्र उपचारो को अपनाया जाए तो शीघ्र हि स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकता हं।

मेष राशि – रोजाना त्रिफला चूर्णका सेवन करें, तथा लाल रंग कि बोतल में धूप में रखा पानी रोजाना शाम को पीये।

वृषभ राशि – काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी का चूर्ण रात के भोजन के बाद ले,सफेद बोतल में धूप मे रखा पानी सेवन करें।

मिथुन राशि – रोजाना त्रिफला चूर्णका सेवन करें, तथा हरे रंग कि बोतल में धूप मे रखा पानी रोजाना शाम को पीये।

कर्क राशि- काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी का चूर्ण रात के भोजन के बाद ले,सफेद बोतल में धूप मे रखा पानी सेवन करें।

सिंह राशि- रोजाना त्रिफला चूर्णका सेवन करें, तथा लाल रंग कि बोतल में धूप में रखा पानी रोजाना शाम को पीये।

कन्या राशि – हरे रंग कि बोतल में धूप मे रखा पानी रोजाना शाम को पीये।

तुला राशि – सफेद बोतल में धूप मे रखा पानी सेवन करे।

वृश्चिक राशि- लाल रंग कि बोतल में धूप मे रखा पानी रोजाना रात को पीये।

धनु राशि- काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी का चूर्ण रात के भोजन के बाद ले, पीले रंग की बोतल में धूप मे रखा पानी सेवन करें।

मकर राशि- त्रिफला चूर्ण का सेवन करें, तथा नीले रंग कि बोतल में धूप में रखा पानी रोजाना रात्री को पीये।

कुम्भ राशि- लौंग का सेवन करें, तथा नीले रंग कि बोतल में धूप में रखा पानी रोजाना रात्री को पीये।

मीन राशि- काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी का चूर्ण रात के भोजन के बाद ले, पीले रंग की बोतल में धूप मे रखा पानी सेवन करें।

वृश्चिक राशि में प्रवेश कर लिया है शुक्र

November 29, 2014

वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014 – नवम्बर 27, 2014
27 नवम्बर 2014 को शुक्र वृश्चिक राशि में उदय होने वाले हैं। ज्योतिष के अनुसार शुक्र के उदय होने से शुक्र के कारकतत्वों की कमी और सुखों की रुकावट दूर हो होंगी। अधिक जानकारी के लिए पंडितोद्वारा यह राशिफल पढ़ें
शुक्र को विवाह, वैवाहिक जीवन और वैवाहिक सुख का कारक माना गया है। यानी शुक्र के अस्त होने की स्थिति में इन सुखों में रुकावट आती है। तो यह रुकावट अब दूर होने वाली है, शुक्र ग्रह उदय होने वाले हैं। जी हाँ, 27 नवम्बर 2014 को शुक्र वृश्चिक राशि में उदय होने वाले हैं। शुक्र के वृश्चिक राशि में उदय होने से आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा आइए जानते हैं।
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सूचना : यह राशिफल आपकी चन्द्र राशि के आधार पर है। अपनी चन्द्र राशि जानने के लिए यहाँ क्लिक करें: अपनी चन्द्र राशि ज्ञात कीजिए
आइए जानते हैं की वृश्चिक राशि में शुक्र का उदय हमारी राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:
मेष राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
एक और सप्तमेश के उदय होने से बेहतरी आएगी लेकिन राशिफल कहता है की अष्टम में होने के कारण कठिनाइयों का प्रतिशत बढ़ भी सकता है। इस समय आत्म निर्भर रहें और ख़र्चों पर नियंत्रण के साथ ही वासनात्मक विचारों पर भी नियंत्रण रखें।
वृषभ राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
राशिफल के अनुसार यह शुक्रोदय आपके निजी जीवन के लिए काफ़ी अनुकूल रहेगा। यदि विवाहित हैं तो वैवाहिक सुख मिलेगा अन्यथा कहीं प्रेम होने के योग हैं। आपका पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा।
मिथुन राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
लाभ के प्रतिशत में कुछ कमी संभावित है। काम अधिक रह सकता है। थोड़ी थकान भी संभावित है। राशिफल समझाता है की निजी जीवन में शांति रखें। दूर की यात्राओं के समय सावधानी से काम लेना उचित रहेगा।
कर्क राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
स्वजनों से दिल की बात शेयर करके खुशी मिलेगी। प्रेम प्रसंग के लिए समय अनुकूल है। मित्र व भाई बंधु से सहयोग मिलेगा। बहु प्रतीक्षित अभिलाषाएँ पूरी होंगी। कला संगीत इत्यादि के प्रति रुचि बढ़ेगी।
सिंह राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
राशिफल के मुताबिक आपका आत्मविश्वास मज़बूत होगा। कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी। मान सम्मान के बढ़ने के भी योग हैं। मनोरंजन करने के कई अवसर मिलेंगे। घरेलू जीवन में बेहतरी आने के भी योग हैं।
कन्या राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
आपका आत्मविश्वास बेहतर होगा। आप उत्साही और स्फूर्तिवान होंगे। पड़ोसी से आत्मीयता बढ़ने की भी सम्भावनाएँ हैं। कार्यक्षेत्र बेहतर होगा। नौकरी के हालात में भी सुधार होगा।
तुला राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
राशिफल के अनुसार आर्थिक मामलों में सुधार आने के योग बन रहे हैं। इस समय आप संचय करने का भी सोचेंगे। रुका हुआ पैसा भी मिल सकता है। घर परिवार में कोई शुभ आयोजन हो सकता है।
वृश्चिक राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
जीवन में आनंदानुभूति का प्रतिशत बढ़ सकता है। राशिफल के अनुसार आपके स्वभाव में शालीनता की अधिकता रहेगी। लेकिन इस समय स्वास्थ्य का ख़याल रखना होगा। वैवाहिक या प्रणय सम्बन्ध बेहतर होंगे।
धनु राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
आप सुख सुविधाओं पर अधिक ख़र्च कर सकते हैं। इस समय अपने विचारों में पवित्रता रखने की कोशिश करें। समय पर और पूरी नींद लें। अनावश्यक दूर की यात्राएँ करने से भी बचें।
मकर राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
बहु प्रतीक्षित अभिलाषाएँ और इच्छाएँ पूरी होंगी। मित्र और सहयोगी आपके मददगार होंगे। राशिफल कहता है की प्रेम सम्बन्ध प्रगाढ़ होंगे। लाभ का प्रतिशत बढ़ेगा। पारिवारिक सुख का स्तर भी बढ़ेगा।
कुम्भ राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
भाग्य साथ है अतः दिल लगाकर काम करें और सफलता पाएँ। राशिफल के मुताबिक काम धंधे के लिए समय अनुकूल है। प्रतिष्ठा और सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। इस समय आप संग्रहशील भी होंगे।
मीन राशिफल: वृश्चिक राशि में शुक्र उदय 2014
आपके भीतर धैर्य की कमी देखने को मिल सकती है। कामों में कुछ अड़चनें रह सकती हैं। इस समय दूर की यात्रा संभावित है। धार्मिक व सामाजिक क्रिया-कलापों से जुड़ाव भी संभव है।

भाग्य जगाने का मन्त्र मन्त्र

November 28, 2014

भाग्य जगाने का मन्त्र

मन्त्रः-
“मन्त्र महामनि विषय ब्याल के ।
मेटत कठिन कुअंग भाल के ।।”

मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभः-
हल्दी की गाँठों की माला बना करके इस मन्त्र के 1000 जप नित्यप्रति ६ मास तक करते रहने से भाग्य अनुकूल हो जाता है ।
इस मन्त्र के प्रयोग से भाग्य की विडम्बनाओं का नाश किया जाता है ।

vaastu

November 27, 2014

vaastu

Mangal graha

November 27, 2014

[www.shastrogyan.com }: 27 नवम्बर 2014 को मंगल का गोचर मकर राशि में हो रहा है। क्या आप जानना चाहेंगे कि यह गोचर क्या बदलाव लाएगा आपके जीवन में? आइए जानते हैं क्या कहते हैं पं हनुमान मिश्रा इस बारे में।
भचक्र का तीसरा ग्रह, मंगल , जिसे ग्रहों में सेनापति की पदवी प्राप्त है वह उच्च का होने जा रहा है यानी की मकर राशि में गोचर करने वाला है। जी हाँ मंगल गृह 27 नवम्बर 2014 को मकर राशि में गोचर करने जा रहा है। यह 4 जनवरी 2014 तक मकर राशि में ही रहने वाले हैं। मकर राशि में जाने के बाद यह न केवल उच्चावस्था में होगा बल्कि बृहस्पति से दृष्ट भी रहेगा ऐसे में इसके शुभ फलों में वृद्धि होना स्वाभाविक है। देश दुनिया के व्यवस्थापन में और भी सुधार आएगा। देश की रक्षा-सुरक्षा नीतियों के और भी सुदृढ़ होने के योग हैं। व्यवस्थापन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिलने के योग बन रहे हैं।
http://www.shastrogyan.com }: मेष
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में दसवें भाव में रहेगा। अत: आपको शुभ समाचार मिलेंगे। आपके व्यावापर व्यवसाय में विस्तार होगा। यदि कोई जमीनी विवाद है तो वह दूर होगा। कोई नया काम शुरू करना चाह रहे हैं तो उसके लिए भी समय मददगार होगा।
वृषभ
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में नौवें भाव में रहेगा। सुदूर स्थलों तक की गई लम्बी यात्राएं सफल होंगी। धर्म-कर्म की ओर मन आकृष्ट होगा। जीवनसाथी के प्रगतिशील होने के भी योग हैं। यदि आपने काम का सम्बन्ध विदेश से है तो समय और भी अनुकूल रहेगा।
मिथुन
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में आठवें भाव में रहेगा। हालांकि यह गोचर स्वास्थ्य के लिए कम अनुकूल है अतः आपको अपने स्वास्थ्य का खयाल रखना ज़रूरी होगा लेकिन कई मामलों में लाभ का प्रतिशत बढ़ सकता है। धन, वाणी व परिवार का ख्याल रखें।
कर्क
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में सातवें भाव में रहेगा। मंगल की यह स्थिति मिश्रित परिणाम देगी काम धंधे और संतान के लिए काफी अनुकूल परिणाम मिलेंगे। प्रेम संबंधों के लिए भी समय अच्छा है, लेकिन यदि विवाहित हैं तो आपसी लड़ाई झगड़े से बचना होगा।
सिंह
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में छठवें भाव में रहेगा। इस अवधि में दूर की यात्राओं के दौरान कुछ कठिनाई रह सकती है। घरेलू जीवन व वैवाहिक जीवन में भी कुछ असंतोष रह सकता है, लेकिन ऐसे काम जिनमे कम्पटीशन हो उसके लिए समय काफी अनुकूल है।
कन्या
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में पांचवें भाव में रहेगा। इस अवधि में कम दूरी की कई यात्राएं करनी पड़ सकती है लेकिन दूर की यात्राओं से बचना बेहतर रहेगा। भाई बंधु मददगार होंगे। इस समय प्रेम प्रसंगों में मर्यादा रखें। संतान के स्वास्थ्य का भी ख़याल रखें।
तुला
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में चौथे भाव में रहेगा। यह ग्रह परिवर्तन आपके लिए शुभ है। आर्थिक मामलों में बेहतरी आने के योग हैं लेकिन वाणी में आ रहे आक्रोश व घरेलू विसंगतियों को रोकने की कोशिश करें। काम धंधे व जीवन साथी के उत्थान के योग बन रहे हैं।
वृश्चिक
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में तीसरे भाव में रहेगा। स्वाभाविक है आपको अच्छे फल मिलेंगे। आपका उत्साह बेहतर होगा। भाई बंधु मददगार होंगे। मान-सम्मान बढ़ने के भी योग हैं लेकिन कुछ मित्र नाराज हो सकते हैं अथवा कोई विरोधी मित्र बनने का प्रयास करेगा।
धनु
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में दूसरे भाव में रहेगा। कुछ खर्चे अचानक सामने आ सकते हैं। इस समय वाणी पर भी बड़ा संयम रखना होगा। परिवार के सदस्यों के कारण भी तनाव सम्भव है। मामला प्रेम सम्बन्ध का हो या पुत्र सम्बन्ध का दोनों रिश्तों को प्यार से निभाएं।
मकर
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में प्रथम भाव में रहेगा। ऐसे में यदि आपने स्वास्थ्य और क्रोध को साध लिया तो बाकी सब ठीक रहेगा। वाहन भी सावधानी से चलाएं। बाकी आपकी मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी साथ ही भूमि या भवन खरीदने के योग बनेंगे। साझेदारी के काम में लाभ होगा।
कुंभ
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में बारहवें भाव में रहेगा। अत: इस अवधि में सावधानी की ज़रूरत रहेगी। बेकार के खर्चे रह सकते हैं। इस समय आत्मनिर्भर रहना बहुत ज़रूरी होगा। हालांकि यदि आपका काम विदेश से सम्बंधित है तो उसमें लाभ मिलेगा। छोटी यात्राएँ भी संभावित हैं।
मीन
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में ग्यारहवें भाव में रहेगा। अतः आर्थिक मामलों में मजबूती आएगी। मित्रों और सहयोगियों से लाभ मिलेगा। भाग्य साथ देगा। बहु प्रतीक्षित इच्छाओं की पूर्ति होगी। दूर की यात्राएँ भाग्यशाली सिद्ध होंगी। पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा।
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my vaastu

October 20, 2012

 

The eternal wisdom of the ancients

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The ancient art of Ayurveda is part of the wisdom and lore of India. Its power and efficacy is recognized across the world. Just like vastu, the origins of Ayurveda can be found in ancient India. The two share a common language and common goals, that is, to enhance the well being of body, mind and spirit. One can not think of health without the proven system of Ayurveda.there is so much wisdom to be found in this medical system. a human body is made up of Panchabhutas i.e. Sky,Air,Fire,Water and Earth and these have a direct effect on the human mind and body. However, man in order to safeguard himself from the severity of the panchbhutas constructed the first house. This automatically created a barrier between him and the elements and made it all the more essential for him to construct the house only after careful planning.
Thus evolved vastu Shastra, which allowed man to plan his house in such a way that instead of becoming an obstruction, the house becomes a correct receptor of panchbhutas.

Ayurveda, which is based on eternal principles, lays stress on how to live life, which is in harmony with the environment around us. from this it is easy to understand that human health is greatly affected by the Panchabhutas.the focus of Ayurveda is on healing, prevention and rejuvenation of one’s health through Ayurveda”s system of balance. This balance is achieved through living in accordance with nature’s laws as also by construction and layout of house according to Vastu.ayurveda also upholds the existence of cosmic energy, which affects both mind and body. in its case it takes three individual forms of vata,pitta and Kapha.

Putting it simply, both Vastu and Ayurveda are two sides of same coin, both having the potential to heal the mind and body if used correctly.

 
The Treasure of Ancient India
One of the most valuable treasures of ancient India, Vaastu Shastra is believed to have been in existence for over 5000 years. It is derived from the Vedas and is rooted in Vedic philosophy. The word Vaastu means to dwell, and Vaastu Shastra is the sacred science of designing and building houses.Vaastu aims to restore the balance between the home and the cosmos, that is the microsm and the macrosm, bringing health, wealth and happiness to individuals. It has long been known that health and happiness do not rely solely on things such as food or exercise. If the mind is upset, the whole body is thrown out of balance, inducing illness, The energy channels of the body, or nadis, receive subtle cosmic energy called prana.Vaastu stipulates that if prana is functioning properly within the home, it ensures good health, wealth and happiness.

Those who ignore the advice of vaastu Shastra experience continual sorrow and disappointment.

The Vastu Principles
 

 

 

 

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The principles of vastu have emerged from a mythology. Although they are constrained by ancient universal laws, they are unchanged by time and remain as relevant today as they were 5000 years ago. According to vastu,the external and the internal are interchangeable, because the underlying energies are the same that govern the elements, such as wind or fire, and the organs of the human body.Vastu states that when buildings and forms are in tune with the underlying cosmic principles, they become a part of the basic structure of the universe and vibrate in harmony with it. These positive vibrations have a different effect on the inhabitants.
In vastu, energy lines run like a large grid across the earth, from North to South and from east towest.If our living and working spaces are oriented according to these directions, it has a direct influence on the residents. The East, from where where the sun rises represents the essence of all begnings.The West indicates the opposite, for as the sun dims we are reminded of endings, the unknown and darkness. The North is the direction of the Pole star, the fixed point in the sky that denotes stability and security. The South represents the past and our ancestry. These cardinal points symbolize earth and the ground rock, from which all forms emerge.

The science of Vastu is complete in itself and, if properly applied, will ensure happiness in worldly life.Vastu acts as abridge between the inner spaces of being and outer spaces of natural order. Inner spaces come under natural control and constraints of Yogashastra.Outer spaces are covered in the knowledge of astrology through in media of 27 constellations, 12 signs of the zodiac, 9 planets and their correlations.

 

 
The Logic of Vastu
The Ancients believed that the mind and body have different activities depending on the time of the day. They designed and originated and oriented various components of a house to harmonize the movement of the sun and daily human cycle according to the rotation of the earth and the position of the sun throughout the day. They divided the 24 hours into eight, representing the eight cardinal directions. The nature of each activity reflects the quality of each direction. Houses that are not properly aligned have no sense of orientation, and cause restlessness, misfortune, and sickness.
Time & Activity
The period between 3 am and 6 am, just before sunrise is called Brahma Muhurta.This time the sun is in the Northeastern section of the house. These hours are ideal for Yoga, meditation, or study.

From 6 am to 9 am, the sun is in the eastern part of the house, which should be low lying to absorb the beneficial ultraviolet rays. This is the time for bathing and preparing for the day, so east is good location for bathroom.

The time between 9 am to 12 in the noon, when the sun is in the Southeast part of the house, is the best time for preparing food to be eaten later in the day. The kitchen and the bathroom are both wet areas of the house, positioned to receive the strong sunlight to keep them dry and hygienic.

After lunch it is time for rest, so the time between noon and 3 pm is called Vishranti, the resting period. The sun is now in the south, the best position for a bedroom.

Now time for studying and work, and the sun is now in the southwest section of the house, the ideal location for a study or library.

The period between 6 pm and 9 pm is the time for eating, sitting or reading. The west is the best location for dining or sitting room.

The time between 9 pm and midnight, when the sun is in the Northwest part of the house, where cowshed is located, was the time to attend to the animals. This part is a good location for another bedroom.

The time between midnight and 3 am, when the sun is in the Northern section, is the time of darkness and secrecy. The North is the best place to hide treasure or valuables, to keep them protected.

 
Vastu Tips
• Vastu acts as a bridge between the inner space of being and outer spaces come under natural control and constraints of yogshastra.Outer spaces are covered in the knowledge of astrology through its media of 27 constellations.12 signs of the zodiac, 9 planets and their correlations.

• A vastu with hundred percent matching characteristics and performance as espoused in vastu shastra is an idealistic condition. In practice, it is decidedly necessary or sometimes,
.even sufficient to achieve a minimum of 50 percent to 60 percent of the characteristics of the ideal conditions in a vastu.

• Particular zones or directions have enhanced positivity for particular class of people. North is related to intellectuals. East is related to military and police people. South is related to businessman and traders. west related to working class.

• The prayer room should be planned in such a manner that the back of the goddess should touch the east wall, with the person facing the east while performing the puja.

• Land with shape similar to back of turtle, circular shape, and triangular shape will not lead to holistic environment.

• Wealth and cash should be stored in the North. The person should face towards north when storing or retrieving cash.

• Even colorful Rangoli and Alpana, which we put in the houses, produce positive emanations.

• East sloping land is prosperous, southeast sloping is death promotive,southeast sloping loses wealth, west sloping indicates loss of offspring, north sloping is prosperous, northeast sloping is good for education and hollow in centre indicates hardships.

• It is considered profitable to purchase additional adjoining land on the north, northwest, and east sides. On no account should any land be acquired on the south or west sides, once a house has been constructed on a plot.

• The main door should not open inside the house. The total number of doors, windows and ventilators in the house should be even in number i.e. 2, 4, 6 etc. but should not end with a 0, that is 10, 20 etc.

• The geometrical axis of the plot should be aligned with the axis of the earth’s magnetic field, that is, one set of boundaries of a plot should be parallel to the North-South axis and the other set to east- West axis. If the boundary lines are not parallel to the magnetic axis, such land is poor for overall growth, peace and happiness.

• The land should be elevated towards the South and West sides and it should be lower in North and East sides for overall growth and happiness.

• If the ratio of two adjacent sides of a size is 1:1 and every corner is a 90 degree angle ,it is called a square and is best for overall growth. If the ratio of width and depth of a site is within 1:15 and all corners are of 90 degree, it is also good for growth. If the depth is more than twice the width, the size becomes weaker for growth.

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Positive entrances
These are indicated by the colour green. The south of the South-East corner and the west of the north-west corner are thought to be moving in the direction of north-east and are therefore considered positive.
Moderate Entrance
These are indicated by the colour yellow and are considered to be neutral locations for doorways.
Negative Entrance
Red shows negative entrances, as they allow movement of negative energy. The east side of the south east corner and the north side of the north-west corner are both moving towards the south-west and are negative.
The Five elements
Eather, Air, Fire, water and Earth are the five natural elements known as Mahabhutas.Though each one of them has an independent character; they act upon one another in a distinctive way when brought together. All five elements should be present in abundance within the home to make it vibrant and filled with positive energy.

Eather
The other four elements depend on the medium of space or eather to circulate freely. Since space corresponds to the sense of hearing in the humans, there should be pleasant, soothing sound and calm space at home.Eather governs the north east section of a building, which should be kept open and spacious to allow the beneficial influences of the cosmic rays. This is the best area for peaceful introspection, meditation and Yoga.

Air
Vayu or air the breath of the purusha is the ally of Agni, as air feeds fire. Both elements have a restless quality about them. It is represented by touch in the human body and, therefore, it is important to furnish a house with pleasing textures and surfaces and to allow an abundance of fresh, free flowing air. The North West section of any space is ruled by the elements of either air or water.

Fire
Fire or Agni is a predominant element symbolizing the vital spark of life. It corresponds to the sight in human beings. Within the home, lighting, colors and temperature are all important ingredients. Fire is depicted by a triangle, so a building on a triangular shaped plot should be avoided because it invokes unwelcome fire. The fire element governs the south east quarter of building and is the best location for kitchen. Agni is also connected with the digestive system of the body so the food clocked in the south east direction assures health.

Water
Water has the same restlessness as air, being a fluid. It symbol is a circle, circular buildings or constructions tend to cause feelings of restlessness. Taste represents the water element and is closely linked to the sense of smell. In the home represents the plumbing system and all the various reflective surfaces such as mirror and glass. The North west is the good area for bathroom or guestroom, since these are the places where many different people may come and go without necessarily staying for long periods.

Earth
Earth or Prithvi represents the quality of form and is the ground on which the other three elements – water, fire and air, function. It is analogous to the sense of smell.Pleasent smell and pleasing aromas need to be present in the abundance within the home. The south west quarter of the home is ruled by earth and, because of the earth tolerant characteristic, can accept heavy weight. The south west is the best place in a room to place heavy cumbersome furniture and storage cupboard.

When all the elements discussed so far are the super imposed on one another, they form a complete energetic picture which is referred to as vastu purush Mandal.this image should not be taken literally but figuratively, as it represents the multy layered forces that are at work within a confined space.

Vibrations, wave, sound and light are the four parameters, which define everything in this world. These four parameters are used in vastu science to rectify and reinforce the qualities of a house.

Colour of sun-Morning sun emits positive ultra-violet rays represented by blue-violet. As it reaches its zenith it emits infra-red rays represented by red-yellow. Green remains neutral.

 

 

vaastu fo Kitchen

March 11, 2010

astrology

Kitchen
The kitchen should be in the south-east portion of the house. The door of the kitchen should be in the north, east or north-east direction opening clockwise. The lady should face east while cooking, for it brings good health to family members. If the lady faces west while cooking it may lead to health problems to ladies; while cooking with the face towards south may lead to financial problems in the family.
Cooking Gas/Range should be in the south-east part of the kitchen. Sink in the kitchen should be installed in the north east. Big windows and ventilators should be in the east direction, while smaller windows should be in south. Exhaust fan should be installed on the eastern wall in the south-east corner. A dishwasher can be placed in the north west of the kit chen.. If any storage cabinets are made in the north east, use these cabinets for light weight storage only. Soft pink and orange color can be used in the kitchen. Drinking water should be placed in the north-east; water filter will be installed in the north east, if required.

Refrigerator should be in the south-west corner. No toilets and bathrooms should be adjoining, and above or below the kitchen. If the kitchen is adjoining a bedroom, the wall between them should be thicker than other walls. Food should never be served in the center of the kitchen, i.e. no dining table should be placed in the center of the kitchen. Dining table should be placed in the north-west cornet of the room. If a dining table is placed in the kitchen one should only face east north while consumption of food as it is good for digestion.

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